हिंदी कहानी अभिमान

*“अभिमान”*
एक उक्ति: *”कभी भी नदी की गहराई दोनों पैर से मत नापें।“*
एक सुंदर कथा:
*एक बार नदी को अपने पानी के प्रचंड प्रवाह पर घमंड हो गया।*
*नदी को लगा कि मुझमें इतनी ताकत है*
*कि मैं पहाड़, मकान, पेड़, पशु, मानव आदि सभी को बहाकर ले जा सकती हूँ।*
*एक दिन नदी ने बड़े गर्वीले अंदाज में समुद्र से कहा,*
*बताओ ! मैं तुम्हारे लिए क्या क्या लाऊँ ?*
*मकान, पशु, मानव, वृक्ष आदि जो तुम चाहो,*
*उसे मैं जड़ से उखाड़कर ला सकती हूँ।*
*समुद्र समझ गया कि नदी को अहंकार हो गया है।*
*उसने नदी से कहा यदि तुम मेरे लिए कुछ लाना चाहती हो तो,*
*थोड़ी सी घास उखाड़कर ले आओ।*
*नदी ने कहा बस ! इतनी सी बात ! अभी लेकर आती हूँ।*
*नदी ने अपने जल का पुरा जोर लगाया पर घास नहीं उखड़ी।*
*नदी ने कई बार जोर लगाया पर असफलता ही हाथ लगी।*
*आखिर नदी हारकर समुद्र के पास पहुँची और बोली।*
*मैं वृक्ष, मकान, पहाड़ आदि तो उखाड़कर ला सकती।*
*जब भी घास को उखाड़ने के लिए पुरा जोर लगाती हूं,*
*तो वह नीचे की ओर झुक जाती है*
*और मैं खाली हाथ उपर से गुजर जाती हूं।*
एक सुंदर निष्कर्ष:
*समुद्र ने नदी की पूरी बात ध्यान से सुनी और मुस्कुराते हुए बोला:*
*जो पहाड़ और वृक्ष जैसे कठोर होते है, ये आसानी से उखड जाते है,*
*किन्तु घास जैसी विनम्रता जिसने सीख ली हो,*
*उसे प्रचंड आंधी तूफान या प्रचंड वेग भी नहीं उखाड़ सकता।*

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