काश शायरी

काश तू इतनी सी…

काश तू इतनी सी मोहब्बत निभा दे, 
जब भी मैं रूठूँ तो तू मुझे मना ले।

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ख्वाबों में गुजरा कल…

काश फिर मिलने की वजह मिल जाए, 
साथ जितना भी बिताया वो पल मिल जाए, 
चलो अपनी अपनी आँखें बंद कर लें, 
क्या पता ख़्वाबों में गुज़रा हुआ कल मिल जाए।

ख्वाबों में गुजरा कल शायरी


काश तू भी बन जाए…

काश तू भी बन जाए तेरी यादों कि तरह, 
न वक़्त देखे न बहाना बस चली आये ।।

काश तू भी बन जाए शायरी


तन्हा नहीं करते…

काश… तू समझ सकती मोहब्बत के उसूलो को, 
किसी की सांसो में समाकर उसे तन्हा नहीं करते ।


वो रोज़ देखता है…

वो रोज़ देखता है डूबते सूरज को इस तरह, 
काश मैं भी किसी शाम का मंज़र होता ।।




क़िस्मत में लिखा होता…

उस की हसरत को मेरे दिल में लिखने वाले, 
काश… उसको भी मेरी क़िस्मत में लिखा होता।


तेरी वफ़ा तेरा हुस्न…

तेरे हुस्न पे तारीफों भरी किताब लिख देता, 
काश… तेरी वफ़ा तेरे हुस्न के बराबर होती ।


मिल जाते वो अल्फ़ाज़…

काश कहीं से मिल जाते वो अल्फ़ाज़ हमें भी, 
जो तुझे बता सकते कि हम शायर कम तेरे आशिक ज्यादा हैं।


वो आकर गले लगाले…

काश… एक ख्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, 
वो आकर गले लगा ले, मेरी इजाजत के बगैर।


काश वो आ जायें…

काश वो आ जायें और देख कर कहें मुझसे, 
हम मर गये हैं क्या? जो इतने उदास रहते हो।


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