इश्क़ शायरी

नक़ाब क्या छुपाएगा…

नक़ाब क्या छुपाएगा
शबाब-ए-हुस्न को,

निगाह-ए-इश्क तो
पत्थर भी चीर देती है ।

नक़ाब क्या छुपाएगा शायरी


गलती से इश्क हुआ…

उससे कह दो कि
मेरी सज़ा कुछ कम कर दे,

हम पेशे से मुज़रिम नहीं हैं
बस गलती से इश्क हुआ था ।

गलती से इश्क हुआ शायरी


दिल ए गुमराह को काश ये…

दिल-ए-गुमराह को
काश ये मालूम होता,

प्यार तब तक हसीन है,
जब तक नहीं होता।

दिल ए गुमराह को काश ये शायरी

मत किया कीजिये दिन…

मत किया कीजिये दिन के
उजालों की ख्वाहिशें,

ये जो आशिक़ों की बस्तियाँ हैं
यहाँ चाँद से दिन निकलता है…।

मत किया कीजिये दिन शायरी


खुदा की रहमत में…

खुदा की रहमत में अर्जियाँ नहीं चलतीं,
दिलों के खेल में खुदगर्जियाँ नहीं चलतीं ।

चल ही पड़े हैं तो ये जान लीजिए हुजुर,
इश्क़ की राह में मनमर्जियाँ नहीं चलतीं ।

खुदा की रहमत में शायरी


 

ये इश्क़ की इन्तहा…

दिल की हसरत मेरी जुबान पे आने लगी,
तूने देखा और ये ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी,
ये इश्क़ की इन्तहा थी या दीवानगी मेरी,
हर सूरत में सूरत तेरी नजर आने लगी।




इश्क शराब जैसा…

ये इश्क भी शराब का नशा जैसा है दोस्तों,
करें तो मर जाएँ और छोड़े तो किधर जाएँ।


मोहब्बत में इतना दम…

तुझे देखे बिना तेरी तस्वीर बना दूँ,
तुझे मिले बिना तेरा हाल बता दूँ,
मेरी मोहब्बत में इतना दम है कि,
तेरी आँखों के आँसू अपनी आँखों से गिरा दूँ।



इश्क़ रुस्वा न हुआ…

जब्त से काम लिया दिल ने तो क्या फक्र करूँ,
इसमें क्या इश्क की इज्ज़त थी कि रुसवा न हुआ,
वक्त फिर ऐसा भी आया कि उससे मिलते हुए,
कोई आँसू भी ना गिरा कोई तमाशा ना हुआ।



बीमारे-इश्क को आराम…

गजल-ए-उल्फत पढ़ लिया करो,
एक खुराक सुबह एक खुराक शाम,
ये वाहिद दवा है जिससे,
बीमारे-इश्क को मिलता है तुरंत आराम।



इश्क़ की बाजी…

लगाके इश्क़ की बाजी सुना है दिल दे बैठे हो,
मुहब्बत मार डालेगी अभी तुम फूल जैसे हो।



उसी से पूछ लो…

उसी से पूछ लो उसके इश्क की कीमत,
हम तो बस भरोसे पे बिक गए।



इश्क़ से पहचान से पहले…

इक बात कहूँ इश्क़ बुरा तो नहीं मानोगे,
बड़ी मौज के थे दिन, तुमसे पहचान से पहले।



इश्क़ ने मगरूर किया…

इस इश्क ने हमें मगरूर कर दिया,
हर खुशी से बहुत दूर कर दिया,
सोचा नहीं था कभी हमें इश्क़ होगा,
पर आपकी नजरों ने मजबूर कर दिया।



तेरे काबिल नहीं रहे…

जा और कोई ज़ब्त की दुनिया तलाश कर
ऐ इश्क़ हम तो अब तेरे काबिल नहीं रहे।



इश्क़ ही ख़ुदा…

जो मिला मुसाफ़िर वो रास्ते बदल डाले,
दो क़दम पे थी मंज़िल फ़ासले बदल डाले।

आसमाँ को छूने की कूवतें जो रखता था,
आज है वो बिखरा सा हौंसले बदल डाले।

शान से मैं चलता था कोई शाह कि तरह,
आ गया हूँ दर दर पे क़ाफ़िले बदल डाले।

फूल बनके वो हमको दे गया चुभन इतनी,
काँटों से है दोस्ती अब आसरे बदल डाले।

इश्क़ ही ख़ुदा है सुन के थी आरज़ू आई,
ख़ूब तुम ख़ुदा निकले वाक़िये बदल डाले।



इश्क है वही जो…

इश्क है वही जो हो एक तरफा,
इजहार-ए-इश्क तो ख्वाहिश बन जाती है,
है अगर इश्क तो आँखों में दिखाओ,
जुबां खोलने से ये नुमाइश बन जाती है।



मेरे इश्क़ की इन्तहा…

वो मुझ तक आने की राह चाहता है,
लेकिन मेरी मोहब्बत का गवाह चाहता है,
खुद आते जाते मौसमों की तरह है,
और मेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता है।



अकेले हम शामिल नहीं…

अकेले हम ही शामिल नहीं हैं इस जुर्म में जनाब,
नजरें जब भी मिली थी मुस्कराये तुम भी थे।



इश्क के रास्ते में…

इश्क के रास्ते में मुमसिक तो बहुत मिले,
मिला दे महबूब से ना आज तक कोई ऐसा मिला.



प्यार का इलज़ाम…

मेरी किस्मत में है एक दिन गिरफ्तार-ए-वफ़ा होना,
मेरे चेहरे पे तेरे प्यार का इलज़ाम लिखा है।



इश्क़ का जूनून…

फिर इश्क़ का जूनून चढ़ रहा है सिर पे,
मयख़ाने से कह दो दरवाज़ा खुला रखे।
————————————–
अकेले हम ही शामिल नहीं हैं इस जुर्म में जनाब,
नजरें जब भी मिली थी मुस्कराये तुम भी थे।
————————————–
लोग पूछते हैं कौन सी दुनिया में जीते हो,
अरे ये मोहब्बत है दुनिया कहाँ नजर आती है।



तजुर्बा इश्क़ का…

तजुर्बा एक ही काफी था बयान करने के लिए,
मैंने देखा ही नहीं इश्क़ दोबारा करके।



ग़म बुरा न लगे…

कुछ अजब हाल है इन दिनों तबियत का साहब,
ख़ुशी ख़ुशी न लगे और ग़म बुरा न लगे ।



किसी का इश्क़…

किसी का इश्क़ किसी का ख्याल थे हम भी,
गए दिनों में बहुत बा-कमाल थे हम भी।



इश्क़ का कहर…

ये इश्क़ जिसके कहर से डरता है ज़माना,
कमबख्त मेरे सब्र के टुकड़ों पे पला है ।



जश्न ए शब में मेरी कभी…

जश्न-ए-शब में मेरी कभी जल न सका इश्क़ का दिया,
वो अपनी अना में रही और मैंने अपने ग़मो को ज़िया।



फ़रिश्ते ही होंगे जिनका…

फ़रिश्ते ही होंगे जिनका हुआ इश्क मुकम्मल,
इंसानों को तो हमने सिर्फ बर्बाद होते देखा है।



इश्क़ में छटपटाना…

मेरी रूह गुलाम हो गई है, तेरे इश्क़ में शायद,
वरना यूँ छटपटाना, मेरी आदत तो ना थी ।



हमारे इश्क़ को यूं…

हमारे इश्क़ को यूं न आज़माओ सनम,
पत्थरों को धड़कना सिखा देते हैं हम ।



इश्क के बादशाह हम…

हमें तो प्यार के दो लफ्ज भी नसीब नहीं,
और
बदनाम ऐसे हैं जैसे इश्क के बादशाह थे हम ।



मिजाज़ ए इश्क में…

वो अच्छे हैं तो बेहतर , बुरे हैं तो भी कबूल,
मिजाज़-ए-इश्क में ऐब-ओ-हुनर देखे नहीं जाते ।



तूने हसीन से हसीन…

तूने हसीन से हसीन चेहरों को उदास किया है
ऐ इश्क़ …
अगर तू इंसान होता तो तेरा कातिल मैं होता ।



इश्क़ मुक़द्दर है…

इश्क़ तो बस मुक़द्दर है कोई ख्वाब नहीं,
ये वो मंज़िल है जिस में सब कामयाब नहीं,
जिन्हें साथ मिला उन्हें उँगलियों पर गिन लो,
जिन्हें मिली जुदाई उनका कोई हिसाब नहीं।



तेरा मेरा इश्क है…

तेरा मेरा इश्क है ज़माने से कुछ जुदा
एक तुम्हारी कहानी है लफ्जों से भरी
एक मेरा किस्सा है ख़ामोशी से भरा।



अनजान सी राहों पर…

अनजान सी राहों पर चलने का तजुर्बा नहीं था,
इश्क़ की राह ने मुझे एक हुनरमंद राही बना दिया।



यह मेरा इश्क़ था…

यह मेरा इश्क़ था या फिर दीवानगी की इन्तहा,
कि तेरे ही करीब से गुज़र गए तेरे ही ख्याल से ।



इश्क़ को भी इश्क़…

इश्क़ को भी इश्क़ हो तो
फिर देखूं मैं इश्क़ को भी,
कैसे तड़पे, कैसे रोये,
इश्क़ अपने इश्क़ में।



खिड़की से झांकता हूँ मै…

खिड़की से झांकता हूँ मै,
सबसे नज़र बचा कर
बेचैन हो रहा हूँ,
क्यों घर की छत पे आ कर
क्या ढूँढता हूँ,
जाने क्या चीज खो गई है,
इन्सान हूँ,
शायद मोहब्बत हमको भी हो गई ।



दिल की आवाज़ को इज़हार…

दिल की आवाज़ को इज़हार कहते हैं,
झुकी निगाह को इकरार कहते हैं,
सिर्फ पाने का नाम इश्क नहीं,
कुछ खोने को भी प्यार कहते हैं।



मुझसे पूछा किसी ने…

मुझसे पूछा किसी ने दिल का मतलब
मैने हँस कह दिया ठिकाना तेरा.
जब पूछा सुहानी शाम किसे कहते हैं,
मैने इतरा के कह दिया चाहना तेरा.
उसने पूछा कि बताओ ये क़यामत क्या है,
मैने घबरा के कह दिया रूठ जाना तेरा.
मौत कहते हैं किसे जब मुझसे पूछा,
मैंने आँखें झुका कर कहा छोड़ जाना तेरा।



दो बातें उनसे की…

दो बातें उनसे की तो दिल का दर्द खो गया,
लोगों ने हमसे पूछा कि तुम्हें क्या हो गया,
बेकरार आँखों से सिर्फ हँस के हम रह गए,
ये भी ना कह सके कि हमें इश्क़ हो गया…।



एहसास ए मुहब्बत के लिए…

एहसास-ए-मुहब्बत के लिए
बस इतना ही काफी है,
तेरे बगैर भी हम, तेरे ही रहते हैं…।



ऐ आशिक तू सोच…

ऐ आशिक तू सोच तेरा क्या होगा,
क्योंकि हस्र की परवाह मैं नहीं करता,
फनाह होना तो रिवायत है तेरी,
इश्क़ नाम है मेरा मैं नहीं मरता।



तुम को तो जान से…

तुम को तो जान से प्यारा बना लिया;
दिल का सुकून आँख का तारा का बना लिया;
अब तुम साथ दो या ना दो तुम्हारी मर्ज़ी;
हम ने तो तुम्हें ज़िन्दगी का सहारा बना लिया।



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