फनी शायरी

जुल्फों में फूलों को सजा के आयी,
चेहरे से दुपट्टा उठा के आयी,
किसी ने पूछा आज बड़ी खुबसूरत लग रही है,
हमने कहा शायद आज नहा के आयी।

ये मोहब्बत नहीं, उसूल-ए-वफ़ा है ऐ दोस्त,
हम जान तो दे देंगे जान का नंबर नहीं देंगे।Screenshot_1.png

इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम,
वस्ल का दिल से मेरे अरमान रुख़्सत हो गया।


दिल दो किसी एक को और वो भी किसी नेक को,
मंदिर का प्रसाद नहीं… जो बांट दो हर एक को।Screenshot_1.png


रहता है इबादत में हमें मौत का खटका,
हम याद ख़ुदा करते हैं कर ले न ख़ुदा याद।

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इससे ज्यादा दुश्मनी की
इन्तहा क्या होगी ग़ालिब
टोयलेट की टंकी में कोई
बर्फ डाल गया।

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वो आज भी हमें देख कर मुस्कुराते हैं,
वो आज भी हमें देख कर मुस्कुराते हैं,
ये तो उनके बच्चे ही कम्बख्त हैं,
जो हमें मामा-मामा बुलाते है।


तुम्हारा साया बन कर ताउम्र तुम्हारा साथ निभायेंगे,
हर एक कदम तुम्हारी राहों को फूलों से सजायेंगे,
अगर मौत ने जुदा कर भी दिया हमें तुमसे,
तो तुम्हारी खिड़की के सामने वाले पेड़ पर,
प्रेत बन कर उलटे लटक जायेंगे




जुल्फों में फूलों को सजा के आयी,
चेहरे से दुपट्टा उठा के आयी,
किसी ने पूछा आज बड़ी खुबसूरत लग रही है,
हमने कहा शायद आज नहा के आयी।


इश्क का जिसको ख्वाब आ जाता है,
समझो उसका वक़्त खराब आ जाता है,
महबूब आये या न आये,
पर तारे गिनने का हिसाब आ जाता है।


कितना शरीफ शख्श है वीवी पे फ़िदा है,
उस पे ये कमाल है कि अपनी पे फ़िदा है।


गर्ल फ्रेंड २-4 होनी चाहिए…
एक तो डायन भी थी।


तारीफ के काबिल हम कहाँ,
चर्चा तो आपकी चलती है,
सब कुछ तो है आपके पास,
बस सींग और पूंछ की कमी खलती है।


आसमान जितना नीला है,
सूरजमुखी जितना पिला है,
पानी जितना गीला है,
आपका स्क्रू उतना ही ढीला है।


ऐ खुदा… हिचकियों में कुछ तो फर्क डाला होता…
अब कैसे पता करूँ कि कौनसी वाली याद कर रही है.


उम्र की राह में जज्बात बदल जाते है,
वक़्त की आंधी में हालात बदल जाते है,
सोचता हूं काम कर-कर के रिकॉर्ड तोड़ दूं,
कमबख्त सैलेरी देख के ख्यालात बदल जाते हैं।


हम भी जान-ए-मन तेरे लिए ताजमहल बनायेंगे,
अर्ज़ किया है,
हम भी जान-ए-मन तेरे लिए ताजमहल बनायेंगे,
एक कप सुबह पिलायेंगे और एक कप शाम को पिलायेंगे।


उस की ‪गली‬ से गुजरे तो उसकी ‪रँगोली‬ भी देख आए।
‪‎गजब‬ की बनाती है…
हमें तो लगा था बस ‪‎मुँह‬ बनाना आता होगा ।।


आशिक पागल हो जाते हैं प्यार में,
बाकी कसर पूरी हो जाती है इंतज़ार में,
मगर ये दिलरुबा नहीं समझती,
वो तो गोल गप्पे और पपड़ी
खाती फिरती है बाज़ार में ।


हमसे मोहब्बत का दिखावा न किया कर,
हमे मालुम है तेरे वफा की डिगरी फर्जी है ।


वो कहती अपने भाइयों से, मेरे आशिक़ को यूँ ना पीटो,
ज़रा गौर फरमाइये…
वो कहती अपने भाइयों से, मेरे आशिक़ को यूँ ना पीटो,
बड़ा ज़िद्दी है ये कमीना, पहले कुत्ते की तरह घसीटो।


लड़कियों से प्यार न करना क्योंकि,
दिखती हैं हीर की तरह,
लगती हैं खीर की तरह,
दिल में चुभती हैं तीर की तरह,
और छोड़ जाती हैं फकीर की तरह ।


मोहब्बत न सही मुक़दमा ही कर दे…
तारीख दर तारीख मुलाकात तो होगी ।


तेरा प्यार भी 2 हजार की नोट जैसा है,
डर लगता है कहीं नकली तो नहीं ।


रोया है फ़ुर्सत से कोई मेरी तरह सारी रात यकीनन,
वर्ना रुख़सत-ए- मार्च में यहाँ बरसात नहीं होती…।


जेलर- सुना है की तुम शायर हो कुछ सुनाओ यार…

कैदी-
गम ए उल्फत मे जो जिन्दगी कटी हमारी,
जिस दिन जमानत हुई जिन्दगी खतम तुम्हारी ।


तुझे पाने के लिये कुछ भी कर सकता हूँ,
तेरे प्यार मे जी तो क्या मर भी सकता हूँ,
फिर भी तू नही मिली तो मुझे कोई गम नही,
ये तरीका किसी दूसरी पर भी सेट कर सकता हूँ।


इतने पड़े हैं डंडे तेरी गली में,
अरमान हो गए ठन्डे तेरी गली में,
एक हाथ में है कंघी जुल्फे संवारते हैं,
गाड़ेंगे आशिकी के झंडे तेरी गली में।

अब क्या बताएं ज़ालिम कैसे गुजारते हैं,
संडे तेरी गली में मंडे तेरी गली में,
सीने पे हाथ रख कर तुझको पुकारते हैं,
जब मारते हैं पत्थर मुंडे तेरी गली में।

तडपते हैं कितना ज़ालिम तुझको तरस न आया,
कर लेंगे ख़ुदकुशी हम वन डे तेरी गली में,
हम ढूढ़ लेंगे कोई दीदार का बहाना,
बेचा करेंगे अंडे तेरी गली में…।


आपकी सूरत मेरे दिल में ऐसे बस गयी है,
जैसे छोटे से दरवाजे में भैंस फंस गयी है..।


आँखों से आसुओं की विदाई कर दो,
दिल से ग़मों की जुदाई कर दो,
गर फिर भी दिल न लगे कही,
तो मेरे घर की पुताई कर दो…।


है हसरत कि हो ऐलान एक दिन,
कि हजरात-ए-इश्क इन्तेकाल कर गए ।


मोहब्बत हमने उसी दिन छोड़ दी थी ग़ालिब…
जब उसने कहा था कि
पप्पियों के पैसे अलग
और झप्पियों के अलग..।


मेरी सांसो में जो समाया बहुत लगता है,
वही शख्स मुझे पराया भी बहुत लगता है,
उनसे मिलने की तमन्ना तो बहुत है मगर,
आने-जाने में किराया ही बहुत लगता है।


निगाहें आज भी उस शख्स को शिद्दत से तलाश करती हैं,
जिसने कहा था…
“बस दसवी कर लो, आगे पढ़ाई आसान है ।”


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