दर्द शायरी

लोग जलते रहे मेरी मुस्कान पर,
मैंने दर्द की अपने नुमाईश न की
जब जहाँ जो मिला अपना लिया,
जो न मिला उसकी ख्वाहिश न की।

लोग जलते रहे शायरी


 

हम ने कब माँगा है तुम से
अपनी वफ़ाओं का सिला,

बस दर्द देते रहा करो
मोहब्बत बढ़ती जाएगी ।

हम ने कब माँगा शायरी


कभी हमने सोचा न था,
तुमसे जुदा हो जायेंगे,
सांसे खफा हो जायेंगी,
हम दर-बदर हो जायेंगे,
ख्वाबों में आकर इस-कदर,
हमको जलाया ना करो,
दीवाने हैं, दीवानों का क्या,
इक दिन फना हो जायेंगे..।

कभी हमने सोचा न शायरी


हकीकत में खामोशी
कभी भी चुप नहीं रहती,

कभी तुम ग़ौर से सुनना
बहुत किस्से सुनाती है ।

खामोशी किस्से सुनाती है शायरी


 

मोहब्बत का मेरे सफर आख़िरी है,
ये कागज कलम ये गजल आख़िरी है ।

मैं फिर ना मिलूँगा कहीं ढूंढ लेना,
तेरे दर्द का ये असर आख़िरी है ।

मोहब्बत का मेरे सफर शायरी


बयाँ करना मोहब्बत को
आसान ना हुआ था ।

ये तो दर्द है कैसे कह दूँ
कि ये तुमने दिया है ।

बयाँ करना मोहब्बत को शायरी



ये क्या है, जो आँखों से रिसता है,
कुछ है भीतर, जो यूँ ही दुखता है,
कह सकता हूं, पर कहता भी नहीं,
कुछ है घायल, जो यहाँ सिसकता है।Screenshot_2.png


कागज की कश्ती से पार जाने की ना सोच,
उड़ते हुए तूफानों को हाथ लगाने की ना सोच,
ये मोहब्बत बड़ी बेदर्द है इससे खेल ना कर,
मुनासिब हो जहाँ तक दिल बचाने की सोच।

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एक फ़साना सुन गए एक कह गए,
हम जो रोये तो मुस्कुराकर रह गए।

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बहारों के फूल एक दिन मुरझा जायेंगे,
भूले से कहीं याद तुम्हें हम आ जायेंगे,
अहसास होगा तुमको हमारी मोहब्बत का,
जब कहीं हम तुमसे बहुत दूर चले जायेंगे।

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आशियाँ बस गया जिनका, उन्हें आबाद रहने दो,
पड़े जो दर्द भरे छाले, जिगर में यूँ ही रहने दो,
कुरेदो ना मेरे दिल को, ये अर्जी है जहां वालों,
छिपा है राज अब तक जो, राज को राज रहने दो।

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कहीं किसी रोज़ यूँ भी होता,
हमारी हालत तुम्हारी होती,
जो रात हमने गुज़ारी तड़प कर,
वो रात तुमने गुज़ारी होती।

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बिखरे अरमान, भीगी पलकें और ये तन्हाई,
कहूँ कैसे कि मिला मोहब्बत में कुछ भी नहीं।

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खुद को औरों की तवज्जो का तमाशा न करो,
आइना देख लो अहबाब से पूछा न करो,
शेर अच्छे भी कहो, सच भी कहो, कम भी कहो,
दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुसवा न करो।

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रास्ते वही होंगे और नज़ारे वही होंगे,
पर हमसफ़र अब हम तुम्हारे नहीं होंगे।

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वो जो तुमसे रुबरु करवाता है,
आजकल वो आइना भी हमसे रूठा है।

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रिहाई दे दो हमें अपनी मोहब्बत की कफस से,
कि अब ये दर्द हमसे और सहा नहीं जाता।

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मोहब्बत का घना बादल बना देता तो अच्छा था,
मुझे तेरी आँख का काजल बना देता तो अच्छा था,
तुझे पाने की ख्वाइश अब जीने नहीं देती,
खुदा तू मुझे पागल बना देता तो अच्छा था।

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​ज़िस्म से मेरे तड़पता दिल कोई तो खींच लो​,
मैं बगैर इसके भी जी लूँगा मुझे अब ​ये यकीन ​है।

​ज़िस्म से मेरे तड़पता शायरी


जो नजर से गुजर जाया करते हैं,
वो सितारे अक्सर टूट जाया करते हैं,
कुछ लोग दर्द को बयां नहीं होने देते,
बस चुपचाप बिखर जाया करते हैं।

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दर्द होता है मगर शिकवा नहीं करते,
कौन कहता है कि हम वफा नही करते,
आखिर क्युँ नहीं बदलती तकदीर “आशिक” की
क्या मुझको चाहने वाले मेरे लिए दुआ नहीं करते।

तकदीर आशिक की शायरी


ना कर तू इतनी कोशिशे,
मेरे दर्द को समझने की,
पहले इश्क़ कर,
फिर चोट खा,
फिर लिख दवा मेरे दर्द की।

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कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी,
सुनते थे कि वो आयेंगे सुनते थे सुबह होगी ।
कब जान लहू होगी, कब अश्क गुहर होगा,
किस दिन तेरी शुनवाई, ऐ दीद-ए-तर होगी।

कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल शायरी



रोज़ पिलाता हूँ एक ज़हर का प्याला उसे…
एक दर्द जो दिल में है मरता ही नहीं है ।

रोज़ पिलाता हूँ एक शायरी


चंद साँसे बची हैं आखिरी बार दीदार दे दो,
झूठा ही सही एक बार मगर तुम प्यार दे दो,
जिंदगी वीरान थी और मौत भी गुमनाम ना हो,
मुझे गले लगा लो फिर मौत मुझे हजार दे दो।चंद साँसे बची हैं शायरी



बदले तो नहीं हैं वो… दिल-ओ-जान के करीने,
आँखों की जलन, दिल की चुभन अब भी वही है।


जख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे,
आँसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे,
ये मत पूछना किसने दर्द दिया,
वरना कुछ अपनों के चेहरे उतर जाएंगे।


दूर जाकर भी हम दूर जा न सकेंगे,
कितना रोयेंगे हम बता न सकेंगे,
ग़म इसका नहीं की आप मिल न सकोगे,
दर्द इस बात का होगा कि हम आपको भुला न सकेंगे।


जिंदगी ने मेरे दर्द का क्या खूब इलाज सुझाया,
वक्त को दवा बताया, ख्वाहिशों से परहेज बताया।


सजा कैसी मिली मुझको तुमसे दिल लगाने की,
रोना ही पड़ा है जब कोशिश की मुस्कुराने की,
कौन बनेगा यहाँ मेरी दर्द-भरी रातों का हमराज,
दर्द ही मिला जो तुमने कोशिश की आजमाने की।


महफिल से उठकर तो कब के चले गये थे वो,
फिर भी उनकी महक फैली रही देर तक।

दीदार ए हुस्न से ही मिलती थी दिल को ठंडक,
फिर भी चेहरा छुपाते रहे वो आज देर तक।

भूल जाता था जो दिल देख कर उनको धड़कना,
जाने क्यों बिना देखे ही उनको आज धड़का है देर तक।

दिल टूटने की आवाज तो दिल मे ही दबकर रही,
जाने क्यों वहाँ इक सन्नाटा फैला रहा देर तक।

जलने को तो सभी दोस्त ही मुझसे जलते रहे,
देखा जो उनका हाथ मेरे हाथ में रखा देर तक।

ना शिकवा रहा ना ही कोई शिकायत रही,
जब होती रही उनसे रात गुफ्तगू देर तक।

बारिश से कह दो कि वह फिर कभी बरसे,
आज आँसुओं ने बरसने कि ठानी है देर तक।

चोट खाकर भी आह भर नहीं सका ‘विनोद’
देखा जो उनका चेहरा मुस्कुराता देर तक।


हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर
वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर
कल वो कह गये भुला दो हुमको
हमने पूछा कैसे…?
तो चले गये हाथो मे जाम देकरl


क्या बताऊँ अपना हाल ए दिल मैं तुम्हें,
देखूं जिधर बस एक ही नूर नज़र आये,
अब बता भी दो दवा ए दर्द क्या है इसकी,
या फिर किसी जाल में फसाया है तुमने हमें।


ज़िक्र उस का ही सही बज़्म में बैठे हो फ़राज़,
दर्द कैसा भी उठे हाथ न दिल पर रखना।


दुनिया बहुत मतलबी है,
साथ कोई क्यों देगा,
मुफ्त का यहाँ कफ़न नहीं मिलता,
तो बिना गम के प्यार कौन देगा।


बिजलियाँ टूट पड़ी… जब वो मुकाबिल से उठा,
मिल के पलटी थीं निगाहें कि धुआँ दिल से उठा।


ख्वाहिश तो ना थी किसी से दिल लगाने की,
मगर जब किस्मत में ही दर्द लिखा था…
तो मोहब्बत कैसे ना होती।


इलाजे-दर्दे-दिल तुमसे मसीहा हो नहीं सकता,
तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता।


एक हसरत थी कि उनके दिल में पनाह मिलेगी,
क्या पता था उनसे मोहब्बत की सज़ा मिलेगी,
न अपनों ने समझा न गैरों ने जाना,
क्या पता था मेरी तक़दीर ही मुझे बेवफा मिलेगी।


तू तब तक रूला सकती है हमें,
जब तक हम दिल मे बसाये हैं तुझे.


सीख रहा हूँ मै भी अब मीठा झूठ बोलने का हुनर,
कड़वे सच ने हमसे, ना जाने, कितने अज़ीज़ छीन लिए।


ज़ख्म सब भर गए बस एक चुभन बाकी है,
हाथ में तेरे भी पत्थर था हजारों की तरह,
पास रहकर भी कभी एक नहीं हो सकते,
कितने मजबूर हैं दरिया के किनारों की तरह।


ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है,
ज़ुल्फ़-ओ-रुखसार की जन्नत नहीं कुछ और भी है,
भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में,
इश्क ही इक हकीकत नहीं कुछ और भी है।


हो सके तो पहचान लो
मेरे दर्द का सबब मेरी नज़र से
ऐ दोस्तों
मै ज़ुबान से कहूंगा…
तो कुछ लोग रुसवा हो जायेंगे।


ज़िन्दगी देने वाले यूँ मरता छोड़ गए,
अपनापन जताने वाले यूँ तनहा छोड़ गए,
जब पड़ी जरुरत हमें अपने हमसफ़र की,
तो साथ चलने वाले अपना रास्ता मोड़ गए.


दर्द तो बहुत है दिल में
पर दिखा नही सकते,
करते है मोहब्बत तुमसे
पर बता नही सकते।


जब कभी तेरा नाम लेते हैं,
दिल से हम इन्तेकाम लेते हैं,
मेरी बरबादियों के अफसाने
मेरे यारों का नाम लेते हैं।


भुला कर हमें क्या वो खुश रह पाएंगे,
साथ में नही तो मेरे जाने के बाद मुस्कुरायेंगे,
दुआ है खुदा से की उन्हें कभी दर्द न देना,
हम तो सह गए पर वो टूट जायेंगे।


दर्द को छुपाए बैठा रहा,
आंखों की नमी को छुपाए बैठा रहा,
उम्मीद टूटी नहीं है अभी भी,
तेरे लौट आने की खुशी में बैठा रहा।



बहुत हो चुका इंतज़ार उनका,
अब और ज़ख़्म सहे जाते नही,
क्या बयान करें उनके सितम को,
दर्द दिल के हैं कहे जाते नही।


मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ,
कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है।


रात को कह दो, कि जरा धीरे से गुजरे;
काफी मिन्नतों के बाद, आज दर्द सो रहा है।


ना किया कर अपने दर्द को
शायरी में बयान ऐ दिल,
कुछ लोग टूट जाते हैं
इसे अपनी दास्तान समझकर।


दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता,
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता,
बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में,
और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता।


कितना लुत्फ ले रहे हैं लोग मेरे दर्द-ओ-ग़म का,
ऐ इश्क देख तूने तो मेरा तमाशा ही बना दिया।


ना तसवीर है तुम्हारी जो दीदार किया जाये,
ना तुम हो मेरे पास जो प्यार किया जाये,
ये कौन सा दर्द दिया है तुमने ऐ सनम,
ना कुछ कहा जाये ना तुम बिन रहा जाये।


बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नहीं जाता,
जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नहीं जाता,
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में,
जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नहीं जाता।


 

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