सावधानी ! प्रोपेर्टी खरीदने से पहले ,दौरान और बाद 

खरीदने के पहले

सपनो का घर खरीदने से पहले बरते कुछ सावधानिया:

जयपुर:अपना घर हो यह हर किसी का सपना होता है। मगर अगर आप घर खरीदने जा रहे हैं तो इससे पहले यह खबर को जरूर पढ़ लें। कंही ऐसा न हो कि सपनो का घर खरीदने के बाद आपको किसी ऐसी बात का पता चले जिससे की आपकी ज़िन्दगी भर की कमाई के सारे पैसे डूब जाएं।

नो अब्जेक्सन सर्टिफिकेट, या  बाधा प्रमाण पत्र:यह दस्तावेज रजिस्ट्रार दफ्तर से जारी किया जाता है। जिससे आपको यह पता चल जाएगा कि जिस घर को आप खरीदने जा रहे है उस पर कोई विवाद या नहीं  या किसी तरह का लोन व् किसी तरह का कोई क़र्ज़ तो बकाया नहीं।

इस प्रमाण पत्र से आपको पता चलेगा कि इस प्रॉपर्टी पर किसी प्रकार का कोई विवाद तो नहीं है। यह आपको प्रॉपर्टी के मालिक के पास मिलेगा।
सेंक्शन.प्लान.अप्रूवल :सेंक्शन प्लान नजदीकी के नगर पालिका या महानगर पालिका में होता है। इस आपको यह पता चल जाएगा कि इस इलाके में कितनी प्रॉपर्टी पर मालिक का हक है। इसका लेखा जोखा ऐसे दफ्तरों में ही होता है।
मदर डीड :मदर डीड एक ऐसा दस्तावेज होता है जिसमें ये सभी जानकारी मिलती है कि यह प्रॉपर्टी पहले किस-किस ने खरीदा था या इसका पहला मालिक कौन था। इसको कितनी बार बेचा गया।

प्रॉपर्टी टैक्स: अपने सपनों का घर  खरीदने से पहले आपको यह भी देख लेना चाहिए कि प्रॉपर्टी बेचने वाले व्यक्ति (कंपनी) अपना प्रॉपर्टी टैक्स चुकाया है या नहीं। इसके लिए तुरंत की  रशीद आपको मांग सकते हैं। एक खास बात और ध्यान में रखें तो  ज्यादा अच्छा होगा कि घर खरीदने से पहले एक अच्छा वकील से संपर्क  कर लें। जिससे आपका काम और भी आसान हो जाएगा।जो आपको एक बेहतर जानकारी मुहैया करवाने में आपकी मद्दद करेगा और आपका काम भी आसान हो जाएगा

लग्जरी मकानों की घटी डिमांड

नाइटफ्रेंक की हालिया रिपोर्ट की मानें तो इकोनॉमिक क्राइसिस की वजह से दुनिया भर में लग्जरी हाउसिंग की डिमांड में कमी आई है। भारत में जहां बिल्डर्स का रुझान अफोर्डेबल और लो कॉस्ट हाउसिंग की तरफ बढा है वहीं मोनाको और बारबाडोस जैसे शहरों में भी ऐसे घरों की कीमतों में कमी आई है।

नाइटफ्रेंक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि कंट्रीसाइड, स्की रिजॉटर्स में संपत्तियों के दामों में १२ फीसदी तक की कटौती हुई है। ये ऐसे इलाके हैं जहां रियल्टी सेक्टर के निवेशक दूसरी संपत्ति खरीदने के लिहाज से निवेश करते हैं। साथ ही ऐसे घरों को किराये के जरिये आमदनी या फिर वीकएंड रिजॉर्ट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जिन शहरों की प्रॉपर्टीज में सबसे ज्यादा कमी आई है, उनमें पुर्तगाल के अल्गार्वे के पद्गिचमी हिस्से, स्पेन के मालोरका द्वीप और डबलिन हैं। इन क्षेत्रों में संपत्तियों के दाम करीब २२ फीसदी तक गिरे हैं।

नाइटफ्रेंक के रेजिडेंशियल रिसर्च के प्रमुख लियाम बैली का कहना है कि एंड यूज के लिए खरीदी जाने वाली संपत्तियों के दामों में बहुत ज्यादा कमी नहीं है, कमी ऐसी प्रॉपर्टीज के दामों में आई है, जिन्हें आराम और मौज-मस्ती के लिए खरीदा जाता है।

जहां तक लग्जरी प्रॉपर्टीज की बात है तो लंदन में इनकी डिमांड सबसे ज्यादा रही। जबकि अमेरिका और कनाडा में लग्जरी मकानों की कीमत में औसतन आठ फीसदी की कमी आई है।

जुलाई से पहले मकान लेना फायदेमंद

अगर आप मकान खरीदने का मन बना रहे हैं तो जुलाई से पहले बुकिंग कराना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जुलाई से निर्माण (कंस्ट्रक्शन) पर नया सर्विस टैक्स लागू होने जा रहा है. इसके बाद फ्लैट का दाम कुल खरीद का करीब तीन फीसदी बढ़ जाएगा. हाल में पेश केंद्रीय बजट में कंस्ट्रक्शन सर्विस और लेवी टैक्स की परिभाषा को निर्माणाधीन मकानों तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है. बजट पर संसद की मुहर लगने के बाद प्रभाव में आने वाला नया नियम कहता है कि अगर भुगतान निर्माण पूरा होने से पहले किया गया है, तो सर्विस टैक्स लगाया जाएगा. रियल्टी कंपनियां आम तौर पर निर्माण शुरू होने से पहले ही प्रॉपर्टी बेच देती हैं और उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि सरकार का यह कदम इस सेक्टर को गहरी चोट पहुंचाएगा क्योंकि मकान की कीमतें बढ़ेंगी और मांग में घटेगी. हालांकि कई कंपनियों ने इस पर चिंता जताई है. उनका तर्क है कि सरकार को निर्माणाधीन आवासीय इकाइयों पर सर्विस टैक्स लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए क्योंकि रियल एस्टेट उद्योग पहले ही अप्रत्यक्ष करों के रूप में 14-16 फीसदी चुका रहा है.

खरीदने के दौरान

जांच पड़ताल जो आएगी काम

अगर फ्लैट या फिर प्लाट लने का मन बना रहे हैं, तो खरीदने से पहले कुछ आवश्यक जांच पड़ताल अवश्य कर ले, जैसे:

१. अलॉटमेंट लेटर: किसी भी फ्लैट या प्लाट को खरीदने से पहले सम्बंधित अथॉरिटी से उसकी पूरी जानकारी अवश्य ले लें. जैसे कि क्या वह जमीन अथॉरिटी द्वारा आवंटित हैं और क्या वास्तव में उस जमीन पर अथॉरिटी द्वारा प्लॉटिंग की गयी हैं? इसके अलावा आप बेचने वाले से जमीन की अलोटमेंट लैटर की प्रति लेकर उसकी सम्बंधित अथॉरिटी के हॉउसिंग डिपार्टमेंट से सत्यापन भी ज़रूर करा ले. ये सब करना इसलिए भी ज़रूरी हैं क्योकि कई बार खेती की ज़मीन को प्लाट के रूप में बेचे जाने के मामले सामने आये है, जिनसे आपको बाद में बहुत दिक्कतों और झंझटो का सामना करना पड़ सकता है.

इसके लिए आप दिल्ली में डी डी ए, गाज़ियाबाद में जी डी ए, और नॉएडा में नॉएडा ऑथोरिटी से संपर्क कर सकते हैं.

अगर आपकी प्रॉपर्टी दिल्ली में है तो

पता : डीडीए, विकास सदन, आईएनए मार्किट, नई दिल्ली।

वेबसाइट : http://www.dda.org.in

अगर आप गाजियाबाद में है तो

पता : जीडीए, मेन हापुड़ रोड, रोडवेज बस अड्डे के पास, गाजियाबाद।

वेबसाइट : http://www.gdaghaziabad.com

फोन नंबर : 0120-2791027

और अगर नोएडा में है तो

पता : नोएडा अथॉरिटी, मेन एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग, सेक्टर 6, नोएडा

वेबसाइट : http://www.noidaauthorityonline.com

फोन नंबर : 0120-2422576, 2422406

हालांकि नॉएडा अथॉरिटी ने गैरकानूनी खरीद फ़रोख्त रोकने के लिहाज से अपनी वेबसाइट पर ब्लेक लिस्ट फर्म की सूची डाली हैं. इसके अलावा वेबसाइट पर उन बिल्डर्स व् ग्रुप होउसिंग सोसाइटी का भी ब्योरा उपलब्ध हैं, जिसे अथॉरिटी ने प्लाट अलॉट किये हैं. इन लिस्ट की मदद से आप अपने डीलर की सही जानकारी पा सकते हैं. वेबसाइट समय समय पर अपनी लिस्ट को अपडेट भी करती रहती हैं.

जरूरतें कई, लोन भी कई

घर की इंसान की जिंदगी में बड़ी अहमियत होती है. जमीन खरीदना, घर बनाना और फिर उसका रख-रखाव आसान नहीं होता. कई बार इसमें इंसान की सामर्थ्य से ज्यादा पैसा लग जाता है. ऐसी ही स्थिति में काम आता है होम लोन.

सबसे पहले तो यह जान लेते हैं कि होम लोन कितनी तरह का होता है.

पहला नंबर आता है घर खरीदने के लिए लोन का. अक्सर लोग बने-बनाए घर खरीदने के लिए ही होम लोन लेते हैं और होम लोन का मतलब भी इसी प्रकार के लोन से लगाया जाता है.

दूसरे नंबर पर आता है कंस्ट्रक्शन लोन. यानी यदि आपके पास पहले से अपनी जमीन हो, तो उस पर मकान बनाने के लिए आप लोन ले सकते हैं।

तीसरा होता है जमीन खरीदने के लिए लोन. यदि आप अपना घर बनाना चाहते हैं या सिर्फ इनवेस्टमेंट के नजरिए से जमीन खरीदना चाहते हैं तो ऐसी स्थिति में आप बैंक से जमीन खरीदने के लिए लोन ले सकते हैं.

घर की मरम्मत के लिए भी लोन मिलता है. यह बात बहुत कम लोगों को ही पता होती है कि उन्हें घर की मरम्मत या उसमें कुछ इंप्रूवमेंट के लिए भी लोन मिल सकता है.

एक लोन कन्वर्जन लोन भी होता है. कन्वर्जन लोन से तात्पर्य पुराने लोन को नए लोन के साथ मिक्स या कन्वर्ट करने से होता है. जैसे यदि आप पर पुराना होम लोन बकाया है और अब आप दूसरा घर खरीदना चाहते हैं, जिसके लिए आपको और पैसे की जरूरत है तो आपको नये घर के लिए लोन तो मिलेगा ही, आपका पुराना लोन भी कन्वर्जन लोन के माध्यम से नए घर के लोन पर ट्रांसफर हो जाएगा.

क्या हों आपकी दुनिया के रंग

रंग अपने बारे में भी बहुत कुछ कहते हैं और आपके बारे में भी. कलर थेरेपी की तो एक अलग विधा ही विकसित हो गई है जो बताती है कि घर में ऐसे ही रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए जो हमारे व्यक्तित्व से मेल खाते हों. इसलिए घर की सजावट में रंगों की अहमियत बहुत ज्यादा हो जाती है. तो आइए जानते हैं कौन सा रंग क्या कहता है और कहां पर फबता है.

लाल

यह स्फूर्ति और उत्तेजना और जिंदादिली का रंग है. फेंग-शुई में इसे प्रेम का प्रतीक कहा जाता है. इसलिए बेडरूम के लिए यह सबसे अच्छा रंग माना जाता है. जीवंतता का अहसास कराने वाले इस रंग को किसी न किसी रूप में डाइनिंग रूम में भी इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि इसे भूख बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है. बच्चों के कमरे में इसके प्रयोग से बचना चाहिए.

पीला

प्रफुल्लता को दर्शाने वाले इस रंग का इस्तेमाल अधिकतर घर के बाहरी हिस्सों में करना बेहतर होता है. मसलन बालकनी, लॉबी या फिर सीढ़ियों के पास. इसके अलावा इसका प्रयोग ऐसे कमरे के लिए भी अच्छा माना जाता है जिसका दरवाजा उत्तर दिशा की तरफ खुलता हो. यानी जिन कमरों में सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती वहां इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

नारंगी

नारंगी रंग विश्वास और स्थिरता को दर्शाता है. ताजगी का अहसास करवाने वाले इस रंग को मुख्य रूप से डाइनिंग रूम में इस्तेमाल करना चाहिए. गहरा नारंगी रंग कमरे को शाही लुक देता है. बच्चों के कमरे में इसके हल्के और गहरे शेड्स का मेल अच्छा लगता है.

हरा

यह प्रकृति का रंग है. किचन के लिए इसे सबसे बेहतर माना जाता है. हालांकि इसके गहरे शेड के इस्तेमाल से बचना चाहिए. गहरा हरा रंग दीवारों के लिए नहीं बल्कि एक्सेसरीज के रूप में उपयुक्त माना जाता है.

गुलाबी

प्यार और विश्वास का प्रतीक गुलाबी यानी पिंक आंखों को सुकून पहुंचाने वाला रंग है. बेडरूम की दीवारों पर लाइट पिंक शेड खूब फबता है. साथ ही एक्सेसरीज का रंग भी यही हो तो क्या कहने.

नीला

शांति और सुकून का पर्याय है नीला रंग. यह एक ऐसा रंग है जिसके ढेर सारे शेड्स उपलब्ध हैं. राजसी-ठाठ-बाठ, आराम, सुरक्षा और स्थायित्व को दर्शाने वाला नीला रंग ताजगी और परिपूर्णता का भी आभास देता है. हल्के और गहरे शेड्स के मेल के साथ इसे बाथरूम में इस्तेमाल किया जा सकता है. बच्चों के कमरे में भी इसका प्रयोग करना बेहतर रहता है.

सफेद

सौम्यता और निर्मलता को दर्शाता सफेद एक ऐसा रंग है जो स्पेस के खुलेपन का भी अहसास कराता है. इसलिए घर अगर छोटा हो तो इसके इस्तेमाल की अहमियत और भी बढ़ जाती है. इसके अलावा सीलिंग के लिए यह पहली पसंद होता है.

खरीदने के बाद

कल आसान लगेगी ईएमआई

 

आप कभी-कभी सोच कर हैरान हो सकते हैं कि पांच साल पहले जब आपने घर की एईएमआई (मासिक किस्त) देना शुरू किया था तो वह आपको कठिन लगती होगी, लेकिन आज वह आसान लगती है. अगले पांच साल में आपके लिए वह ईएमआई और भी आसान लगेगी. इसके पीछे महंगाई दर की भी भूमिका है. लंबी अवधि में महंगाई के दबाव से रुपये की कीमत लगातार घटती है. हो सकता है पांच साल पहले 30,000 रुपये की ईएमआई आपके वेतन का 50 फीसदी हो, लेकिन 8 फीसदी सालाना की महंगाई दर के दबाव में उसके अनुपात में आपका वेतन भी बढ़ता है. ऐसे में हो सकता है कि पांच साल बाद आज वह ईएमआई आपके वेतन का एक तिहाई ही हो. आपके घर की बाजार कीमत भी इस दौरान इतनी बढ़ चुकी होगी कि आप अपना कर्ज चुकाने में आराम महसूस करेंगे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप कर्ज लेकर शॉपिंग करें या आईपीओ में पैसा लगाएं. लोन का घर या अन्य प्रॉपर्टी खरीदने में लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए किया गया उपयोग आपको आने वाले समय में महंगाई से लडऩे में मदद करता है.

 

मकान किराएं पर दें तो…

 

रिटायर होने के बाद अमेरिका में रह रहे बेटे के पास जाने से पहले मल्होत्रा साहब ने सोचा कि क्यों न दिल्ली का अपना फ्लैट किराए पर दे दिया जाए. सोचा कि उसकी देखभाल भी हो जाएगी और कुछ पैसे भी जुड़ते रहेंगे. आने से एकाध महीने पहले बता देंगे और मकान खाली हो जाएगा. उनके दूर के किसी रिश्तेदार ने उन्हें अपने किसी परिचित के बारे में बताया और मल्होत्रा साहब ने सोचा कि क्योंकि रिश्तेदार का परिचित ही है तो ज्यादा पूछताछ क्या करनी. किराया आप ही ले लिया करना, यह कहकर चाबी अपने रिश्तेदार को पकड़ा दी और बेटे के पास चले गए.

एक साल बाद उन्हें वतन की याद आई तो मल्होत्रा साहब ने सोचा कि छह सात महीने भारत में रहकर आया जाए. रिश्तेदार को फोन किया तो पता चला कि फोन नंबर स्विच आफ. काफी कोशिश की लेकिन नहीं मिला. खैर. भारत आए और अपने फ्लैट में पहुंचे तो पता चला कि वह परिचित तो फर्जी दस्तावेज बनाकर औऱ फ्लैट बेचकर गायब हो गया है. अब आगे थी मुकदमेबाजी और बेमतलब की टेंशन.

इसलिए प्रॉपर्टी भले ही रेजिडेंशियल हो या कॉमर्शियल किराए पर देने से पहले कुछ सावधानियां बरतें ताकि कोई परेशानी न हो. रेंट एग्रीमेंट में दोनों पक्षों की शर्तों को पूरी तरह शामिल किया जाए। इसमें किराया भुगतान का तरीका, सुविधाओं का ब्योरा और रिन्युअल की दशा जरूर शामिल हो. प्रॉपर्टी को किराए पर देने या लेने से पहले लीज या रेंट एग्रीमेंट जरूर किया जाए. यही नहीं इसमें दोनों पक्षों की शर्तों को शामिल किया जाना चाहिए. भविष्य में किसी भी विवाद से बचने के लिए एग्रीमेंट में सभी शर्तों का साफ-साफ खुलासा करना ठीक रहता है. कोई भी एग्रीमेंट कानूनी सलाहकारों की देखरेख में ही तैयार कराना चाहिए.

प्रॉपर्टी को किराए पर देने या लेने से पहले उसके मालिक के बारे में स्पष्ट ब्योरा होना चाहिए. मसलन वो प्रॉपर्टी किसके नाम है और वो क्यों किराए पर देना चाहता है. अगर प्रॉपर्टी का मालिक उसको किराए पर न दे रहा हो और ये काम कोई पावर ऑफ अटॉर्नी धारक कर रहा हो, तो उसकी भी वैधता स्पष्ट होनी चाहिए. जो भी किराए पर दे रहा हो, उसको इसके बारे में कानूनी हक होना चाहिए. किराए पर देने के लिए ऐसा होना जरूरी है. कई बार लोग फर्जी कागजात के सहारे प्रॉपर्टी को किराए पर उठा देते हैं. बाद में लोगों को बेकार में कानूनी पचड़े झेलने पड़ते हैं.

रेंट एग्रीमेंट की शर्तों पर दोनों पक्षों में पहले ही बात हो जानी चाहिए. अगर आप मालिक हैं और प्रॉपर्टी किराए पर देना चाहते हैं, तो फिर रेंट एग्रीमेंट पर आपको और किराएदार को दस्तखत करने होंगे. दोनों पक्षों की शर्तों पर सहमति होने पर ही एग्रीमेंट पर साइन किए जाने चाहिए. रेंट एग्रीमेंट में प्रापर्टी का पूरा डिटेल दिया जाना चाहिए. मसलन उसकी लोकेशन आदि का स्पष्ट ब्योरा. इसके अलावा दोनों पक्षों के पते आदि का साफ-साफ जिक्र होना चाहिए. एग्रीमेंट कब से कब तक के लिए है इस बारे में भी पहले से ही तय कर लिया जाना चाहिए. साथ ही सिक्योरिटी डिपॉजिट, इस पर ब्याज मिलेगा या नहीं और इसकी वापसी की क्या स्थिति रहेगी, इसका विवरण भी दिया जाए. किराए के भुगतान का तरीके, एडवांस और मासिक किराए का साफ-साफ जिक्र करना बेहतर रहता है. एडवांस किराए को किस तरह एडजस्ट किया जाएगा. ऐसा होगा या नहीं इसका विवरण भी दिया जाना चाहिए. किराया कितने समय बाद बढ़ाया जाएगा और ये कितने फीसदी बढ़ेगा, इससे संबंधित शर्तों को भी एग्रीमेंट में जोड़ा जाना चाहिए.

किराए पर दी जा रही प्रॉपर्टी में कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी, इसका ब्योरा भी दिया जाना चाहिए. किराएदार को कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी. कामन एरिया आदि का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा. साथ ही म्यूनिसिपल कार्पोरेशन और हाउसिंग सोसाइटी आदि के चार्जेज का भुगतान कौन करेगा, इसका उल्लेख करना ठीक रहता है. बिजली, जनरेटर, लिफ्ट और एसी आदि की सुविधाएं हों, तो इसका भी जिक्र किया जाए. प्रॉपर्टी की रिपेयेरिंग आदि का क्या तरीका होगा. कौन सी मरम्मत किराएदार कराएगा और किस टूट-फूट के लिए मकान मालिक जिम्मेदार होगा, इस बारे में ठीक से उल्लेख किया जाना चाहिए.

एग्रीमेंट रद्द होने की दशा का जिक्र भी किया जाना चाहिए. यानी दोनों पक्षों को कौन-कौन सी शर्तें माननी होंगी, इसका ब्योरा एग्रीमेंट में दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही नोटिस पीरियड को भी इसमें शामिल किया जा सकता है. मसलन किराएदार खाली करने से कितने दिन पहले सूचित करेगा और प्रॉपर्टी मालिक प्रॉपर्टी खाली कराने से कितने दिन पहले नोटिस देगा, इसका जिक्र बेहद जरूरी होता है.

किन-किन शर्तों के पालन पर एग्रीमेंट का रिन्युअल हो सकेगा. साथ ही इसकी शर्तें क्या होंगी, इसका भी जिक्र किया जा सकता है. अगर प्रॉपर्टी एक साल से ज्यादा के लिए किराए पर दी जा रही है, तो इसके एग्रीमेंट को रजिस्टर्ड भी कराना चाहिए. इसके लिए जरूरी स्टांप ड्यूटी भी चुकाई जानी चाहिए.

अगर आप रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी किराए पर दे रहे हैं, तो ध्यान रखें कि किराए पर देने के बाद उस प्रॉपर्टी पर किराएदार का हक हो जाता है. अगर किराएदार समय पर किराए का भुगतान कर रहा है और एग्रीमेंट की शर्तों का पालन कर रहा है, तो उससे प्रॉपर्टी को खाली नहीं कराया जा सकता. हालांकि इस बारे में भी कई शर्तें हैं. फिर भी ये तथ्य मकान मालिकों को ध्यान में रखना चाहिए कि प्रॉपर्टी को किराए पर देने का मतलब होता है किराएदार को सब कुछ सौंपना. जो लोग इन बातों का खयाल नहीं रखते हैं, उनको बाद में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. यही नहीं ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग किराएदारों से सालों से प्रॉपर्टी खाली नहीं करा पाए हैं. बेहतर यही है कि एग्रीमेंट में सारी शर्तों का ठीक-ठीक पालन किया जाए. नहीं तो मल्होत्रा साहब की तरफ पछताना पड़ सकता है.

प्रॉपर्टी खरीद ने के बाद की जानकारियाँ

 

अपने देश में एक कहावत काफी प्रचलित है कि शादी और घर भगवान ही तय करते हैं। वास्तविकता भी यही है कि फइनैंसिंग के अलावा इन दोनों मामलों में किस्मत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किस्मत वाले हिस्से को ज्योतिषियों पर छोड़ते हुए हम फाइनैंसिंग के मसले पर बात करते हैं। घरेलू प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री करते समय कई बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है। आम तौर पर हम पुरानी जायदाद बेचते हैं और नई प्रॉपर्टी खरीदते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में कई तरह के खर्च छुपे होते हैं।

 

कर : प्रॉपर्टी बेचने से प्राप्त राशि पर लगने वाले कर की जानकारी आपको होनी चाहिए। प्रॉपर्टी बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स का भुगतान करना होता है। अगर प्रॉपर्टी खरीदने के 3 साल के भीतर बेची जाती है तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स का भुगतान करना होता है। प्रॉपर्टी बेचने से प्राप्त होने वाली राशि उस साल की आपकी सकल आय में जुड़ जाती है।

अगर आप 3 साल बाद प्रॉपर्टी बेचते हैं तो प्राप्त राशि पर इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20 प्रतिशत के हिसाब से और बिना इंडेक्सेशन के 10 प्रतिशत के हिसाब से कर लगाया जाता है। प्रॉपर्टी बेचने से प्राप्त राशि का निवेश आप विशेष रूप से जारी किए जाने वाले कैपिटल गेन बांड्स में कर सकते हैं लेकिन इसमें वार्षिक अधिकतम 50 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है और इसकी लॉक-इन अवधि 3 साल की होती है।

इसके अतिरिक्त  पिछला घर बेचने के 2 साल के भीतर दूसरा घर खरीद कर या तीन साल के भीतर दूसरा घर बनवा कर लांग टर्म कैपिटल गेन की बचत कर सकते हैं। जमीन में निवेश कर लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स बचाने की धारणा गलत है। इस बारे में आप टैक्स प्लानर से संपर्क कर सकते हैं। मूल बात यह है कि जब आप पुरानी प्रॉपर्टी बेच कर नई प्रॉपर्टी खरीदने जाते हैं तो आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि कर किस प्रकार लगाया जाता है।

 

खरीद-बिक्री का खर्च : जब कभी आप पुरानी प्रॉपर्टी बेचते हैं या नई प्रॉपर्टी खरीदने जाते हैं तो उस पर स्टांप ड्यूटी, रियल्टी की कीमत आंकने वाने की फीस, एप्रेजल फीस, कंस्ट्रक्शन की गुणवत्ता जांचने वाले और वकील की फीस आदि देनी होती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो ये शुल्क कम नहीं होते। कभी-कभार खरीदने या बेचने वाला पक्ष आपसे लेन-देन के सभी शुल्क चुकाने को कहता है।

 

प्राधिकरण के खर्च : प्राधिकरण के कई प्रकार के खर्चे होते हैं जिसे फाइनैंस कराने की जरूरत होती है। इनमें रेगुलैराइजेशन शुल्क, भूमि के इस्तेमाल का कनवर्जन शुल्क, ट्रांसफर शुल्क, डेवलपमेंट शुल्क, मैप शुल्क या दस्तावेजों के वेरिफिकेशन शुल्क आदि शामिल होते हैं।

 

बिचौलिए का कमीशन : घरेलू प्रॉपर्टी के लिए मौजूदा कमीशन लेन-देन की कीमत का 1-2′ चल रहा है। बातचीत के जरिए इसे कम कराया जा सकता है। इसमें तब और आसानी होती है जब आप एक ही ब्रोकर के जरिए प्रॉपर्टी खरीद और बेच रहे हों। बाजार के नियम एवं शर्तों के अनुसार चलने पर आप घाटे में रह सकते हैं। यह बढिय़ा रहेगा कि आप लेन-देन से पहले ही बिचौलिए का कमीशन तय कर लें।

 

पुरानी प्रॉपर्टी से जुड़े शुल्क : आपने देखा होगा कि सब्जियों को ताजा बनाए रखने के लिए 5-10 मिनट के अंतराल पर पानी का छिड़काव करता रहता है। बिक्री वाली प्रॉपर्टी का उचित रख-रखाव जरूरी है। अगर आप घरेलू प्रॉपर्टी बेचने जा रहे हैं तो इसकी मरम्मत और पेंटिंग कराने की जरूरत पड़ सकती है। इससे आपको बेहतर कीमत मिल सकती है।

 

पूर्वभुगतान शुल्क : अगर पुरानी प्रापर्टी आपने कर्ज लेकर खरीदी हुई है तो प्रापर्टी ट्रांसफर करने से पहले उसका भुगतान करना जरूरी हो जाता है। लोन का पूर्वभुगतान शुल्क कर्ज की बकाया मूल राशि का 1 प्रतिशत से 4 प्रतिशत तक होता है।

 

होम इंश्योरेंस : यह महत्वपूर्ण होता है। नया घर खरीदने के साथ ही आपको हो इंश्योरेंस लेने की जरूरत होती है। इसकी लागत मकान के क्षेत्रफल, स्थान, घर के सामान और प्रॉपर्टी की कीमत पर निर्भर करती है।

 

मॉर्टगेज कवर : अगर नई प्रॉपर्टी लोन लेकर खरीद रहे हैं तो आपको अतिरिक्त जीवन बीमा कवर लेना चाहिए। अधिकतर मामलों में कर्जदाता चाहता है कि आप लोन के साथ ही एक बीमा पॉलिसी ले लें और प्रीमियम की राशि कर्ज की राशि में जोड़ दी जाती है। हालांकि, आपको इसकी जगह टर्म इंश्योरेंस कवर को तरजीह देनी चाहिए। टर्म इंश्योरेंस में कवर की राशि पुनर्भुगतान अवधि के दौरान यथावत बनी रहती है जबकि मॉर्टगेज इंश्योरेंस के मामले में मासिक किस्तों के भुगतान के साथ ही यह घटता जाता है।

 

नया लोन : नया लोन आप मौजूदा ब्याज दरों के आधार पर लेंगे। हो सकता है कि आपका पुराना लोन कम ब्याज दर पर लिया गया हो और अब ब्याज के खर्चे बढ़ गए हों।

इसके अतिरिक्त, लोन उपलब्ध कराने वाली सभी कंपनियां प्रोसेसिंग और डॉक्यूमेंटेशन के लिए एक तय शुल्क लेती हैं। कुछ कंपनियां आपसे मासिक किस्तों के अग्रिम भुगतान के लिए भी कहती हैं। इन खर्चों के लिए किसी व्यक्ति को तैयार रहना चाहिए।

पार्किंग व अन्य खर्च : अगर खरीदी जाने वाली नई प्रॉपर्टी अपार्टमेंट या फ्लैट है तो आपको पार्किंग शुल्क के तौर पर सालाना या एकमुश्त राशि का भुगतान करना होता है।

 यह शुल्क बिल्डिंग मेंटिनेंस निर्धारित करता है और यह पार्किंग की श्रेणी पर निर्भर करता है। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नए घर में रहने की तैयारी करनी होती है जिसमें फर्नीचर, पर्दे, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि शामिल होते हैं। इस प्रकार के छोटे-छोटे खर्च जुड़ कर बड़ी राशि बन जाती है और हमारे घरेलू बचट पर भारी पड़ सकते हैं। इनकी व्यवस्था कर चलने में ही बुद्धिमानी है।


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